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Posts about poem

एक सवाल

मेरे भीतर कुछ हो रहा है।
एक आवाज़ है जो गूंज रही है।
कब? कब? कब? कब?
एक सवाल है जो गूंज रहा है।
कब? कब? कब? कब?
टकरा रहा है अंदरूनी दीवारों से,
तोड़ रहा है।

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